श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 54: लङ्कापुरी का दहन और राक्षसों का विलाप  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.54.31 
तत: स लङ्कापुरपर्वताग्रे
समुत्थितो भीमपराक्रमोऽग्नि:।
प्रसार्य चूडावलयं प्रदीप्तो
हनूमता वेगवतोपसृष्ट:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात लंकापुरी पर्वत के शिखर पर अग्नि प्रज्वलित हो उठी। वहाँ अग्निदेव का भयंकर तेज प्रकट हुआ। महाबली हनुमान द्वारा प्रज्वलित अग्नि की लपटें चारों ओर फैल गईं और वेग से प्रज्वलित होने लगीं।
 
Thereafter a fire broke out on the peak of the Lankapuri mountain. There the terrifying might of Agnidev was manifested. The fire lit by the mighty Hanuman spread its flames all around and blazed with great vigour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)