श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 54: लङ्कापुरी का दहन और राक्षसों का विलाप  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.54.2 
किं नु खल्ववशिष्टं मे कर्तव्यमिह साम्प्रतम्।
यदेषां रक्षसां भूय: संतापजननं भवेत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
अब लंका में मेरे लिए ऐसा कौन सा कार्य शेष रह गया है, जिससे इन राक्षसों को अधिक कष्ट हो?'
 
Now what task is left for me to perform in Lanka that would cause more distress to these demons?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)