श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 53: राक्षसों का हनुमान जी की पूँछ में आग लगाकर उन्हें नगर में घुमाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.53.30 
यदि मां तारयेदार्य: सुग्रीव: सत्यसंगर:।
अस्माद् दु:खाम्बुसंरोधाच्छीतो भव हनूमत:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
यदि सत्यनिष्ठ आर्य सुग्रीव मुझे इस दुःखसागर से छुड़ा सकें, तो आप हनुमान के लिए शीतल हो जाएँ॥30॥
 
"If Sugreeva, the truthful Arya, can rescue me from this ocean of sorrow, then you become cool for Hanuman." ॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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