श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 53: राक्षसों का हनुमान जी की पूँछ में आग लगाकर उन्हें नगर में घुमाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.53.1 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा दशग्रीवो महात्मन:।
देशकालहितं वाक्यं भ्रातुरुत्तरमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
छोटे भाई महात्मा विभीषण के वचन देश-काल के लिए उपयुक्त तथा हितकर थे। उन्हें सुनकर दशानन ने इस प्रकार उत्तर दिया-॥1॥
 
The words of younger brother Mahatma Vibhishan were appropriate and beneficial for the country and time. On hearing them, Dashanan replied in this manner -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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