श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.52.6 
राजन् धर्मविरुद्धं च लोकवृत्तेश्च गर्हितम्।
तव चासदृशं वीर कपेरस्य प्रमापणम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'वीर महाराज! इस वानर का वध धर्म के विरुद्ध है और सामाजिक नीति की दृष्टि से भी निंदनीय है। आप जैसे वीर पुरुष के लिए यह कदापि उचित नहीं है।'
 
‘Valiant Maharaj! Killing this monkey is against Dharma and is also condemned from the point of view of social ethics. This is not at all appropriate for a brave person like you.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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