श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.52.23 
तस्मान्नास्य वधे यत्न: कार्य: परपुरंजय।
भवान् सेन्द्रेषु देवेषु यत्नमास्थातुमर्हति॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अतः हे शत्रु नगर को जीतने वाले राजन! आपको इस दूत को मारने का प्रयत्न नहीं करना चाहिए। आप इन्द्र सहित समस्त देवताओं पर आक्रमण करने में समर्थ हैं।॥23॥
 
‘Therefore, O King, who has conquered the enemy city! You should not make any attempt to kill this messenger. You are capable enough to attack all the gods including Indra.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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