श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 52: विभीषण का दूत के वध को अनुचित बताकर उसे दूसरा कोई दण्ड देने के लिये कहना तथा रावण का उनके अनरोध को स्वीकार कर लेना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.52.21 
साधुर्वा यदि वासाधु: परैरेष समर्पित:।
ब्रुवन् परार्थं परवान् न दूतो वधमर्हति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
चाहे वह अच्छा हो या बुरा, शत्रुओं ने ही भेजा है; अतः वह उन्हीं के हित की बात कहता है। दूत सदैव अधीन रहता है, अतः वह वध के योग्य नहीं है॥21॥
 
‘Whether it is good or bad, the enemies have sent it; hence it speaks for their benefit. A messenger is always subservient, hence he is not worthy of being killed.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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