श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  5.51.5-6 
ज्येष्ठस्तस्य महाबाहु: पुत्र: प्रियतर: प्रभु:।
पितुर्निदेशान्निष्क्रान्त: प्रविष्टो दण्डकावनम्॥ ५॥
लक्ष्मणेन सह भ्राता सीतया सह भार्यया।
रामो नाम महातेजा धर्म्यं पन्थानमाश्रित:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
‘उनके परमप्रिय ज्येष्ठ पुत्र, अत्यन्त बलशाली एवं पराक्रमी श्री रामजी अपने पिता की आज्ञा से धर्म के मार्ग का अनुसरण करते हुए अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ दण्डकारण्य में आये।॥5-6॥
 
‘His most beloved eldest son, the very powerful and powerful Sri Rama, on the orders of his father, following the path of Dharma, came to Dandakaranya along with his wife Sita and brother Lakshmana.॥ 5-6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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