श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.51.44 
ब्रह्मा स्वयम्भूश्चतुराननो वा
रुद्रस्त्रिनेत्रस्त्रिपुरान्तको वा।
इन्द्रो महेन्द्र: सुरनायको वा
स्थातुं न शक्ता युधि राघवस्य॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
चार मुख वाले स्वयंभू ब्रह्मा, तीन नेत्रों वाले त्रिपुर संहारक रुद्र अथवा देवताओं के स्वामी महान एवं ऐश्वर्यशाली इन्द्र भी समरांगण में श्री रघुनाथजी के सामने नहीं टिक सकते॥ 44॥
 
Even the four-faced Swayambhu Brahma, the three-eyed Tripura destroyer Rudra or even the great and opulent Indra, the lord of the gods, cannot stand in front of Shri Raghunathji in Samarangana.' 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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