श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.51.43 
देवाश्च दैत्याश्च निशाचरेन्द्र
गन्धर्वविद्याधरनागयक्षा:।
रामस्य लोकत्रयनायकस्य
स्थातुं न शक्ता: समरेषु सर्वे॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
निशाचरराज! श्री रामचन्द्रजी तीनों लोकों के स्वामी हैं। देवता, दानव, गन्धर्व, विद्याधर, नाग और यक्ष- ये सब मिलकर भी युद्ध में उनके सामने नहीं टिक सकते॥43॥
 
Nishacharraj! Shri Ramchandraji is the lord of all three worlds. Gods, demons, Gandharvas, Vidyadhars, Nagas and Yakshas - all of them together cannot stand against him in battle. 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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