| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना » श्लोक 40-42h |
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| | | | श्लोक 5.51.40-42h  | देवासुरनरेन्द्रेषु यक्षरक्षोरगेषु च।
विद्याधरेषु नागेषु गन्धर्वेषु मृगेषु च॥ ४०॥
सिद्धेषु किंनरेन्द्रेषु पतत्त्रिषु च सर्वत:।
सर्वत्र सर्वभूतेषु सर्वकालेषु नास्ति स:॥ ४१॥
यो रामं प्रति युध्येत विष्णुतुल्यपराक्रमम्। | | | | | | अनुवाद | | भगवान् श्री रामजी श्री विष्णु के समान पराक्रमी हैं। देवता, दानव, मनुष्य, यक्ष, राक्षस, नाग, विद्याधर, नाग, गन्धर्व, मृग, सिद्ध, किन्नर, पक्षी तथा अन्य समस्त प्राणियों में किसी भी समय ऐसा कोई नहीं है जो श्री रघुनाथजी का मुकाबला कर सके। 40-41 1/2॥ | | | | Lord Shri Ram is as mighty as Shri Vishnu. Among the gods, demons, humans, Yakshas, demons, snakes, Vidyadhars, Nagas, Gandharvas, deers, Siddhas, eunuchs, birds and all other creatures, there is no one at any time who can take on Shri Raghunathji. 40-41 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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