श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.51.37 
स्वानि मित्राणि मन्त्रींश्च ज्ञातीन् भ्रातॄन् सुता‍न‍‍्हितान्।
भोगान् दारांश्च लङ्कां च मा विनाशमुपानय॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
‘इन मित्रों, मन्त्रियों, कुटुम्बियों, भाइयों, पुत्रों, शुभचिन्तकों, स्त्रियों, भोग के साधनों और सम्पूर्ण जगत् को मृत्यु के मुख में मत डालो।॥37॥
 
‘Do not throw these friends, ministers, family members, brothers, sons, well-wishers, wives, means of enjoyment and the entire world into the mouth of death.॥ 37॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas