श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.51.34 
यां सीतेत्यभिजानासि येयं तिष्ठति ते गृहे।
कालरात्रीति तां विद्धि सर्वलङ्काविनाशिनीम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जिसे तुम सीता के नाम से जानते हो और जो इस समय तुम्हारे अंतःपुर में विद्यमान है, उसे ही कालरात्रि समझो जो सम्पूर्ण लंका का नाश कर देगी॥ 34॥
 
The one whom you know as Sita and who is now present in your inner chambers, consider her to be Kalaratri who will destroy the entire Lanka.॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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