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श्लोक 5.51.34  |
यां सीतेत्यभिजानासि येयं तिष्ठति ते गृहे।
कालरात्रीति तां विद्धि सर्वलङ्काविनाशिनीम्॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| जिसे तुम सीता के नाम से जानते हो और जो इस समय तुम्हारे अंतःपुर में विद्यमान है, उसे ही कालरात्रि समझो जो सम्पूर्ण लंका का नाश कर देगी॥ 34॥ |
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| The one whom you know as Sita and who is now present in your inner chambers, consider her to be Kalaratri who will destroy the entire Lanka.॥ 34॥ |
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