कामं खल्वहमप्येक: सवाजिरथकुञ्जराम्।
लङ्कां नाशयितुं शक्तस्तस्यैष तु न निश्चय:॥ ३१॥
अनुवाद
यद्यपि मैं अकेला ही हाथी, घोड़े और रथों सहित सम्पूर्ण लंका का विनाश कर सकता हूँ, तथापि श्री रघुनाथजी ऐसा नहीं सोचते - उन्होंने मुझे इस कार्य की अनुमति नहीं दी है॥31॥
Although I alone can destroy the entire Lanka including its elephants, horses and chariots, yet Sri Raghunathji does not think so - he has not given me permission for this task.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥