श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.51.3 
भ्रातु: श्रृणु समादेशं सुग्रीवस्य महात्मन:।
धर्मार्थसहितं वाक्यमिह चामुत्र च क्षमम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अब अपने भाई महात्मा सुग्रीव का धर्म और अर्थ से परिपूर्ण वचन सुनो, जो इस लोक और परलोक में भी कल्याणकारी हैं॥3॥
 
‘Now listen to the message of your brother, the great soul Sugreeva, words full of righteousness and meaning, which are beneficial in this world as well as the next.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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