श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.51.29 
प्राप्तं धर्मफलं तावद् भवता नात्र संशय:।
फलमस्याप्यधर्मस्य क्षिप्रमेव प्रपत्स्यसे॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तुमने यहाँ पूर्व में जो पुण्य कर्म किये थे, उनका पूरा फल भोग लिया है। अब तुम्हें सीताहरण रूपी इस पाप कर्म का फल शीघ्र ही भोगना पड़ेगा।'
 
You have reaped the full benefits of the good deeds you did in the past here. Now, you will soon reap the benefits of this bad deed in the form of kidnapping Sita.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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