श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.51.27 
सुग्रीवो न च देवोऽयं न यक्षो न च राक्षस:।
मानुषो राघवो राजन् सुग्रीवश्च हरीश्वर:।
तस्मात् प्राणपरित्राणं कथं राजन् करिष्यसि॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'राक्षसराज! सुग्रीव और श्री रामचन्द्रजी न तो देवता हैं, न यक्ष, न राक्षस। श्री रघुनाथजी तो मनुष्य हैं और सुग्रीव तो वानरों का राजा है। अतः तुम उनके हाथों से अपने प्राण कैसे बचाओगे?॥ 27॥
 
‘Demon King! Sugreeva and Shri Ramchandraji are neither gods, nor yakshas, ​​nor demons. Shri Raghunathji is a human being and Sugreeva is the king of monkeys. So how will you protect your life from their hands?॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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