श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.51.24 
नेयं जरयितुं शक्या सासुरैरमरैरपि।
विषसंस्पृष्टमत्यर्थं भुक्तमन्नमिवौजसा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जैसे विषयुक्त पदार्थ से मिश्रित अन्न को कोई भी बलपूर्वक नहीं खा सकता और न ही उसे पचा सकता है, वैसे ही देवता और दानवों के लिए सीताजी को अपनी शक्ति से पचा पाना असम्भव है॥ 24॥
 
Just as no one can eat food mixed with poisonous substances and digest it by force, similarly it is impossible for the gods and demons to digest Sitaji by their own powers.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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