श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.51.20 
न चापि त्रिषु लोकेषु राजन् विद्येत कश्चन।
राघवस्य व्यलीकं य: कृत्वा सुखमवाप्नुयात्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजा! तीनों लोकों में ऐसा एक भी प्राणी नहीं है जो प्रभु श्री राम का अपराध करके सुखी रह सके॥20॥
 
King! There is not a single creature in the three worlds who can remain happy by committing crime against Lord Shri Ram. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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