श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 51: हनुमान जी का श्रीराम के प्रभाव का वर्णन करते हुए रावण को समझाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.51.13 
तां हरीणां सहस्राणि शतानि नियुतानि च।
दिक्षु सर्वासु मार्गन्ते ह्यधश्चोपरि चाम्बरे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘इस समय सैकड़ों, हजारों और लाखों वानर सब दिशाओं में, आकाश में और पाताल में भी सीता को खोज रहे हैं।॥13॥
 
‘At this time hundreds, thousands and lakhs of monkeys are searching for Sita in all directions, in the sky and in the netherworld as well.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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