श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 5: हनुमान जी का रावण के अन्तः पुर में घर-घर में सीता को ढूँढ़ना और उन्हें न देखकर दुःखी होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.5.22 
चन्द्रप्रकाशाश्च हि वक्त्रमाला
वक्रा: सुपक्ष्माश्च सुनेत्रमाला:।
विभूषणानां च ददर्श माला:
शतह्रदानामिव चारुमाला:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उसने चाँद की तरह चमकते चेहरों की पंक्तियाँ, सुंदर पलकों वाली तिरछी आँखों की पंक्तियाँ और बिजली की चमकती रेखाओं की तरह सुंदर आभूषणों की पंक्तियाँ देखीं।
 
He saw rows of faces shining like the moon, rows of slanting eyes with beautiful eyelashes, and rows of beautiful ornaments like sparkling lines of lightning.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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