श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 5: हनुमान जी का रावण के अन्तः पुर में घर-घर में सीता को ढूँढ़ना और उन्हें न देखकर दुःखी होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.5.16 
ननन्द दृष्ट्वा स च तान् सुरूपान्
नानागुणानात्मगुणानुरूपान्।
विद्योतमानान् स च तान् सुरूपान्
ददर्श कांश्चिच्च पुनर्विरूपान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वे सुन्दर रूप वाले, अनेक गुणों से युक्त, गुणों के अनुरूप आचरण करने वाले और तेजस्वी थे। हनुमान जी उन्हें देखकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने अनेक राक्षसों को सुन्दर रूप वाले और कुछ को अत्यन्त कुरूप देखा॥16॥
 
They were beautiful in appearance, had many virtues, behaved in accordance with their virtues and were radiant. Hanuman ji was very pleased to see them. He saw many demons endowed with beautiful appearance and some appeared very ugly to him.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)