श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 49: रावण के प्रभावशाली स्वरूप को देखकर हनुमान जी के मन में अनेक प्रकार के विचारों का उठना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.49.2 
भ्राजमानं महार्हेण काञ्चनेन विराजता।
मुक्ताजालवृतेनाथ मुकुटेन महाद्युतिम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
वह अत्यन्त तेजस्वी दैत्यराज अपने मोतीजड़ित स्वर्ण-निर्मित, बहुमूल्य एवं चमकते हुए मुकुट से चमक रहा था॥ 2॥
 
That extremely illustrious Demon King was shining from his precious and dazzling crown made of gold studded with pearls.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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