श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.48.8 
बलानि सुसमृद्धानि साश्वनागरथानि च।
सहोदरस्ते दयित: कुमारोऽक्षश्च सूदित:।
न तु तेष्वेव मे सारो यस्त्वय्यरिनिषूदन॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उनके साथ ही हाथी, घोड़े और रथसहित मेरी अनेक शक्तिशाली सेनाएँ भी नष्ट हो गईं और तुम्हारा प्रिय मित्र कुमार अक्ष भी मारा गया। हे शत्रुसूदन! तीनों लोकों को जीतने की जो शक्ति मुझमें है, वह केवल तुममें ही है। पहले जो मारे गए थे, उनमें वह शक्ति नहीं थी (अतः तुम्हारी विजय निश्चित है)।॥8॥
 
‘Along with them, many of my powerful armies including elephants, horses and chariots were also destroyed and your dear friend Kumar Aksha was also killed. O Shatrusudan! The power that I have to conquer the three worlds is only in you. Those who were killed earlier did not have that power (therefore your victory is certain).॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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