श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.48.7 
निहता: किंकरा: सर्वे जम्बुमाली च राक्षस:।
अमात्यपुत्रा वीराश्च पञ्च सेनाग्रगामिन:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'देखो, किंकर नाम के सभी राक्षस मारे गए। यहाँ तक कि जम्बूमाली नाम का राक्षस भी नहीं बच सका। मंत्री के सात वीर पुत्र और मेरे पाँच सेनापति भी मारे गए।'
 
‘Look, all the demons named Kinkar were killed. Even the demon named Jambumali could not survive. The seven brave sons of the minister and my five generals also died.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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