श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  5.48.58 
स ददर्श महातेजा रावण: कपिसत्तमम्।
रक्षोभिर्विकृताकारै: कृष्यमाणमितस्तत:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
उस समय महाबली रावण ने देखा कि वानरों में श्रेष्ठ हनुमान को बड़े-बड़े राक्षस इधर-उधर घसीट रहे हैं।
 
At that time the mighty Ravana saw the best of the apes, Hanuman, being dragged here and there by huge demons.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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