श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.48.56 
हन्यतां दह्यतां वापि भक्ष्यतामिति चापरे।
राक्षसास्तत्र संक्रुद्धा: परस्परमथाब्रुवन्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
अन्य राक्षस भी अत्यन्त क्रोध में भरकर एक दूसरे से इस प्रकार कहने लगे - 'इस बन्दर को मार डालो, जला दो या खा लो ॥ 56॥
 
Some other demons, who were filled with great anger, said to each other thus - 'Kill this monkey, burn him or eat him.' ॥ 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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