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ramayan 5.48.54: उन वानर-मुकुटधारी योद्धाओं को उन्मत्त हाथी के समान बाँधकर राक्षसों ने राक्षसराज रावण की सेवा में समर्पित कर दिया ॥ 54॥   |   ramayan सर्ग 5.48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.48.54 
तं मत्तमिव मातङ्गं बद्धं कपिवरोत्तमम्।
राक्षसा राक्षसेन्द्राय रावणाय न्यवेदयन्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
उन वानर-मुकुटधारी योद्धाओं को उन्मत्त हाथी के समान बाँधकर राक्षसों ने राक्षसराज रावण की सेवा में समर्पित कर दिया ॥ 54॥
 
Tied up like a mad elephant, the demons dedicated those monkey-crowning warriors to the service of the demon-king Ravana. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)