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श्लोक 5.48.53  |
अथेन्द्रजित् तं प्रसमीक्ष्य मुक्त-
मस्त्रेण बद्धं द्रुमचीरसूत्रै:।
व्यदर्शयत् तत्र महाबलं तं
हरिप्रवीरं सगणाय राज्ञे॥ ५३॥ |
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| अनुवाद |
| तदनन्तर इन्द्रजित ने ब्रह्मास्त्र से मुक्त हुए तथा वृक्ष की छालों की रस्सियों से बँधे हुए उन महाबली वानरों को देखकर उन्हें अपने पार्षदों सहित राजा रावण को वहाँ दिखाया॥53॥ |
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| Then Indrajit, seeing those mighty monkeys freed from Brahmastra and tied with the ropes of the barks of the tree, showed them there to King Ravana along with his councillors. 53॥ |
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