श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.48.39 
ततोऽथ बुद्‍ध्वा स तदस्त्रबन्धं
प्रभो: प्रभावाद् विगताल्पवेग:।
पितामहानुग्रहमात्मनश्च
विचिन्तयामास हरिप्रवीर:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मास्त्र से स्वयं को बंधा हुआ जानकर भी उन्हीं ब्रह्माजी के प्रभाव से हनुमान्‌जी को किंचितमात्र भी पीड़ा नहीं हुई। वे प्रमुख वानर वीर अपने ऊपर ब्रह्माजी की महान कृपा का विचार करने लगे॥39॥
 
Despite knowing himself to be bound by the Brahmastra, Hanuman ji did not experience even the slightest pain due to the influence of the same Lord Brahma. Those prominent monkey heroes started thinking about the great grace of Brahmaji on them. 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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