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ramayan 5.48.3: इन्द्र के आश्रय में रहने वाले देवता और मरुद्गण भी युद्धस्थल में आपके अस्त्रों के बल के सामने टिक नहीं पाए हैं॥3॥   |   ramayan सर्ग 5.48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.48.3 
त्वदस्त्रबलमासाद्य ससुरा: समरुद‍्गणा:।
न शेकु: समरे स्थातुं सुरेश्वरसमाश्रिता:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र के आश्रय में रहने वाले देवता और मरुद्गण भी युद्धस्थल में आपके अस्त्रों के बल के सामने टिक नहीं पाए हैं॥3॥
 
Even the gods and the Maruts who reside under the protection of Indra have not been able to stand their ground when faced with the might of your weapons in the battle-field.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)