श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.48.29 
तत: स तत्स्यन्दननि:स्वनं च
मृदङ्गभेरीपटहस्वनं च।
विकृष्यमाणस्य च कार्मुकस्य
निशम्य घोषं पुनरुत्पपात॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उस समय अपने रथ की घरघराहट, मृदंग, भेरी और पटह आदि वाद्यों की ध्वनि तथा धनुष के खींचने की टंकार की ध्वनि सुनकर हनुमान पुनः ऊपर की ओर उछल पड़े।
 
At that time listening to the rattling sound of his chariot, the sounds of the musical instruments like Mridanga, Bheri and Patah and the twirling sound of the bow being pulled, Hanuman again jumped upwards.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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