श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.48.26 
तत: समेतावतितीक्ष्णवेगौ
महाबलौ तौ रणनिर्विशङ्कौ।
कपिश्च रक्षोऽधिपतेस्तनूज:
सुरासुरेन्द्राविव बद्धवैरौ॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर वे दोनों वीर पुरुष, भयंकर वेग और महान् बल से सम्पन्न तथा युद्ध में निर्भय होकर आगे बढ़ने वाले वीर हनुमान्‌जी और राक्षसराज मेघनाद, एक दूसरे से वैरभाव करके देवताओं के राजा इन्द्र और दैत्यराज मेघनाद के समान एक दूसरे से लड़ने लगे॥26॥
 
Then, those two brave men, Hanuman, the brave warrior who was full of fierce speed and great strength and moved forward fearlessly in the battle, and the demon prince Meghnad developed enmity with each other and fought against each other like the king of gods, Indra and the king of demons. 26॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas