श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 48: इन्द्रजित और हनुमान जी का युद्ध, उसके दिव्यास्त्र के बन्धन में बँधकर हनुमान् जी का रावण के दरबार में उपस्थित होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.48.24 
आयान्तं स रथं दृष्ट्वा तूर्णमिन्द्रध्वजं कपि:।
ननाद च महानादं व्यवर्धत च वेगवान्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र के प्रतीक चिन्ह से सुसज्जित रथ पर बैठे हुए मेघनाद को शीघ्रता से आते देख महाबली वानर योद्धा हनुमान ने जोर से गर्जना की और अपना शरीर फैला लिया।
 
Seeing Meghnad approaching swiftly, seated on a chariot decorated with a flag bearing the emblem of Indra, the mighty monkey warrior Hanuman roared loudly and expanded his body.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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