श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.47.37 
महाकपिर्भूमितले निपीडॺ तं
चकार रक्षोऽधिपतेर्महद्भयम्।
महर्षिभिश्चक्रचरै: समागतै:
समेत्य भूतैश्च सयक्षपन्नगै:।
सुरैश्च सेन्द्रैर्भृशजातविस्मयै-
र्हते कुमारे स कपिर्निरीक्षित:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महाबली हनुमान् ने अक्षकुमार को पृथ्वी पर पटककर राक्षसराज रावण के हृदय में महान भय उत्पन्न कर दिया। उनके मरते ही बड़े-बड़े ऋषि, यक्ष, नाग, भूत और नक्षत्रों में विचरण करने वाले इंद्र सहित देवता वहाँ एकत्र हो गए और उन्होंने बड़े आश्चर्य से हनुमान्जी को देखा॥37॥
 
By throwing Akshkumar on the earth, the great monkey Hanuman created great fear in the heart of the demon king Ravana. After his death, the great sages, yakshas, ​​serpents, ghosts and the gods including Indra who roamed around in the constellations gathered there and saw Hanumanji with great astonishment. 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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