| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध » श्लोक 36 |
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| | | | श्लोक 5.47.36  | स भग्नबाहूरुकटीपयोधर:
क्षरन्नसृङ्निर्मथितास्थिलोचन:।
सम्भिन्नसंधि: प्रविकीर्णबन्धनो
हत: क्षितौ वायुसुतेन राक्षस:॥ ३६॥ | | | | | | अनुवाद | | नीचे गिरते ही उसकी भुजाएँ, जाँघें, कमर और छाती टुकड़े-टुकड़े हो गईं, रक्त बहने लगा, शरीर की हड्डियाँ चूर-चूर हो गईं, आँखें बाहर निकल आईं, हड्डियों के जोड़ टूट गए और नसों तथा रक्तवाहिनियों के बंधन ढीले पड़ गए। इस प्रकार पवनपुत्र हनुमान ने उस राक्षस का वध कर दिया। | | | | As soon as he fell down, his arms, thighs, waist and chest broke into pieces, blood started flowing, the bones of the body were shattered, his eyes popped out, the joints of the bones broke and the bonds of the nerves and blood vessels became loose. In this way, that demon was killed by Hanuman, the son of the wind. | | ✨ ai-generated | | |
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