| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध » श्लोक 34 |
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| | | | श्लोक 5.47.34  | कपिस्ततस्तं विचरन्तमम्बरे
पतत्त्रिराजानिलसिद्धसेविते।
समेत्य तं मारुतवेगविक्रम:
क्रमेण जग्राह च पादयोर्दृढम्॥ ३४॥ | | | | | | अनुवाद | | तब वायु के समान वेग और पराक्रम वाले महाबली वानरराज हनुमान्जी पक्षीराज गरुड़, वायु और सिद्धों से सेवित आकाशमार्ग में विचरण करते हुए उस राक्षस के पास पहुँचे और उसके दोनों पैर दृढ़तापूर्वक पकड़ लिए॥34॥ | | | | Then Hanuman, the great monkey king, having the speed and might of the wind, while roaming in the sky-path served by the king of birds Garuda, Vayu and the Siddhas, reached near that demon and caught hold of both his legs firmly. ॥ 34॥ | | ✨ ai-generated | | |
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