श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.47.31 
स तस्य तानष्ट वरान् महाहयान्
समाहितान् भारसहान् विवर्तने।
जघान वीर: पथि वायुसेविते
तलप्रहारै: पवनात्मज: कपि:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् आकाश में विचरण करते हुए वीर वानर पवनकुमार ने अपने थपेड़ों से अक्षकुमार के उन आठ उत्तम एवं विशाल घोड़ों को यमलोक में भेज दिया, जो भार वहन करने में समर्थ थे तथा नाना प्रकार की चाल बदलने की कला में निपुण थे।
 
Thereafter, the valiant monkey Pavankumar, roaming in the sky, with his slaps sent to Yamaloka those eight excellent and huge horses of Akshakumar, who were capable of bearing the load and were well trained in the art of changing various manoeuvres.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas