Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.47.3: वह महाबली राक्षस-सिर वाला अक्ष, जो प्रातःकाल के सूर्य के समान तेजस्वी था, तपे हुए सोने की जाली से मढ़े हुए रथ पर आरूढ़ होकर महावानर हनुमानजी की ओर बढ़ा॥3॥ | ramayan सर्ग 5.47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो महान् बालदिवाकरप्रभं
प्रतप्तजाम्बूनदजालसंततम्।
रथं समास्थाय ययौ स वीर्यवान्
महाहरिं तं प्रति नैर्ऋतर्षभ:॥ ३॥
अनुवाद
वह महाबली राक्षस-सिर वाला अक्ष, जो प्रातःकाल के सूर्य के समान तेजस्वी था, तपे हुए सोने की जाली से मढ़े हुए रथ पर आरूढ़ होकर महावानर हनुमानजी की ओर बढ़ा॥3॥
That mighty demon-headed Aksha, as radiant as the morning sun and mounted on a chariot covered with a net of heated gold, proceeded towards the great monkey Hanumanji. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥