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ramayan 5.47.28: उसका हृदय वीरता और उत्साह से भरा हुआ है। वह युद्धभूमि के मुहाने पर मेरे सामने खड़ा है और मेरी ओर देख रहा है। इस वेगशाली और वीर योद्धा का पराक्रम देवताओं और दानवों के हृदय को भी दहला देने वाला है॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 5.47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.47.28 
पराक्रमोत्साहविवृद्धमानस:-
समीक्षते मां प्रमुखोऽग्रत: स्थित:।
पराक्रमो ह्यस्य मनांसि कम्पयेत्
सुरासुराणामपि शीघ्रकारिण:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उसका हृदय वीरता और उत्साह से भरा हुआ है। वह युद्धभूमि के मुहाने पर मेरे सामने खड़ा है और मेरी ओर देख रहा है। इस वेगशाली और वीर योद्धा का पराक्रम देवताओं और दानवों के हृदय को भी दहला देने वाला है॥ 28॥
 
‘His heart is filled with valour and enthusiasm. He is standing in front of me at the mouth of the battlefront and is looking at me. The valour of this swift and brave warrior can shake the hearts of even the gods and demons.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)