Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.47.27: यह महामनस्वी दैत्यपुत्र बल और पराक्रम में महान है। युद्ध में यह सावधान और एकाग्र रहता है तथा शत्रु के प्रहार को सहन करने में अत्यंत समर्थ है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इसके कर्म और गुणों की श्रेष्ठता के कारण नागों, यक्षों और ऋषियों ने इसकी प्रशंसा की होगी॥ 27॥ | ramayan सर्ग 5.47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अयं महात्मा च महांश्च वीर्यत:
समाहितश्चातिसहश्च संयुगे।
असंशयं कर्मगुणोदयादयं
सनागयक्षैर्मुनिभिश्च पूजित:॥ २७॥
अनुवाद
यह महामनस्वी दैत्यपुत्र बल और पराक्रम में महान है। युद्ध में यह सावधान और एकाग्र रहता है तथा शत्रु के प्रहार को सहन करने में अत्यंत समर्थ है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इसके कर्म और गुणों की श्रेष्ठता के कारण नागों, यक्षों और ऋषियों ने इसकी प्रशंसा की होगी॥ 27॥
‘This great-minded demon son is great in terms of strength and valour. He is cautious and focused in battle and is extremely capable of withstanding the enemy's attack. There is no doubt that he must have been praised by the serpents, yakshas and sages due to the excellence of his deeds and qualities.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥