श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.47.23 
स ताञ्छरांस्तस्य हरिर्विमोक्षयं-
श्चचार वीर: पथि वायुसेविते।
शरान्तरे मारुतवद् विनिष्पतन्
मनोजव: संयति भीमविक्रम:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
उस युद्धस्थल में मन के समान वेगवान वीर हनुमान्‌ अपना भयानक पराक्रम दिखाने लगे। अक्षकुमार के उन बाणों को व्यर्थ करते हुए वे वायु के मार्ग में चलते और वायु के समान दो बाणों के बीच से निकल जाते थे।
 
In that battlefield, the brave Hanuman, who was as fast as the mind, started displaying his terrifying prowess. Making those arrows of Akshkumar futile, he used to move in the path of the wind and pass between two arrows like the wind.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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