श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.47.21 
स तेन बाणै: प्रसभं निपातितै-
श्चकार नादं घननादनि:स्वन:।
समुत्सहेनाशु नभ: समारुजन्
भुजोरुविक्षेपणघोरदर्शन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उसके छोड़े हुए प्रबल बाणों से घायल होकर हनुमानजी ने तुरन्त ही बड़े उत्साह और गम्भीर स्वर में गर्जना की, मानो आकाश को चीरने वाला मेघ हो। उस समय उनकी दोनों भुजाएँ और जाँघें हिलने लगीं, जिससे वे अत्यन्त भयंकर दिखाई देने लगे।
 
Being pierced by the forceful arrows shot by him, Hanuman immediately roared with great enthusiasm and in a deep voice like a cloud tearing the sky. At that time he looked very fearsome due to the movement of both his arms and thighs.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas