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ramayan 5.47.19: युद्धस्थल में अक्षकुमार का पराक्रम अत्यन्त महान् दिखाई दे रहा था। उसका तेज, बल, पराक्रम और बाण सब बढ़ गए थे। युद्धस्थल में उसे देखकर हर्ष और उत्साह से भरे हुए हनुमान्‌जी भयंकर मेघ के समान गर्जना करने लगे॥19॥   |   ramayan सर्ग 5.47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.47.19 
कपिस्ततस्तं रणचण्डविक्रमं
प्रवृद्धतेजोबलवीर्यसायकम्।
कुमारमक्षं प्रसमीक्ष्य संयुगे
ननाद हर्षाद् घनतुल्यनि:स्वन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल में अक्षकुमार का पराक्रम अत्यन्त महान् दिखाई दे रहा था। उसका तेज, बल, पराक्रम और बाण सब बढ़ गए थे। युद्धस्थल में उसे देखकर हर्ष और उत्साह से भरे हुए हनुमान्‌जी भयंकर मेघ के समान गर्जना करने लगे॥19॥
 
On the battlefield, Akshkumar's prowess was seen to be very great. His brilliance, strength, valour and arrows were all enhanced. Looking at him on the battlefield, Hanuman ji, filled with joy and enthusiasm, roared like a fierce cloud.॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)