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ramayan 5.47.16: तत्पश्चात्, वानरराज के श्रेष्ठ मंत्री हनुमान्‌जी राक्षसराज रावण के राजकुमार अक्ष को अत्यन्त सुन्दर अस्त्र और अद्भुत धनुष धारण किए हुए देखकर हर्ष और उत्साह से भर गए और युद्ध के लिए उत्सुक होकर अपना शरीर बढ़ाने लगे॥16॥   |   ramayan सर्ग 5.47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.47.16 
तत: प्लवङ्गाधिपमन्त्रिसत्तम:
समीक्ष्य तं राजवरात्मजं रणे।
उदग्रचित्रायुधचित्रकार्मुकं
जहर्ष चापूर्यत चाहवोन्मुख:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, वानरराज के श्रेष्ठ मंत्री हनुमान्‌जी राक्षसराज रावण के राजकुमार अक्ष को अत्यन्त सुन्दर अस्त्र और अद्भुत धनुष धारण किए हुए देखकर हर्ष और उत्साह से भर गए और युद्ध के लिए उत्सुक होकर अपना शरीर बढ़ाने लगे॥16॥
 
Thereafter, Hanumanji, the best minister of the monkey king, seeing Prince Aksha of the demon king Ravana wearing the most beautiful weapon and a wonderful bow, was filled with joy and enthusiasm and, eager for the war, started increasing his body. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)