Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.47.12: गले में स्वर्ण पदक, भुजाओं में बाजूबंद और कानों में सुन्दर कुण्डल धारण किए हुए वह वीर योद्धा रावणपुत्र हनुमान के पास पहुँचा। उस समय उन दोनों वीरों का युद्ध अतुलनीय था। उनका युद्ध देवताओं और दानवों के हृदय में भी भय उत्पन्न करने के लिए पर्याप्त था॥12॥   |   ramayan सर्ग 5.47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 47: रावणपुत्र अक्ष कुमार का पराक्रम और वध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.47.12 
स हेमनिष्काङ्गदचारुकुण्डल:
समाससादाशुपराक्रम: कपिम्।
तयोर्बभूवाप्रतिम: समागम:
सुरासुराणामपि सम्भ्रमप्रद:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
गले में स्वर्ण पदक, भुजाओं में बाजूबंद और कानों में सुन्दर कुण्डल धारण किए हुए वह वीर योद्धा रावणपुत्र हनुमान के पास पहुँचा। उस समय उन दोनों वीरों का युद्ध अतुलनीय था। उनका युद्ध देवताओं और दानवों के हृदय में भी भय उत्पन्न करने के लिए पर्याप्त था॥12॥
 
Wearing a golden medal around his neck, armlets on his arms and beautiful earrings in his ears, the valiant warrior approached Hanuman, the son of Ravana. The clash between those two heroes at that time was incomparable. Their fight was enough to instill fear in the hearts of even the gods and demons.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)