श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 46: रावण के पाँच सेनापतियों का वध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.46.7 
वानरोऽयमिति ज्ञात्वा नहि शुद्धॺति मे मन:।
नैवाहं तं कपिं मन्ये यथेयं प्रस्तुता कथा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'वह बन्दर है' ऐसा सोचकर मेरा मन उसके प्रति शुद्ध (विश्वासपूर्ण) नहीं हो रहा है। वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए या जो कुछ चल रहा है, उसे देखते हुए मैं उसे बन्दर नहीं मानता। 7.
 
My mind is not becoming pure (trustful) towards him by thinking that 'he is a monkey'. Looking at the present situation or the things that are going on, I do not consider him to be a monkey. 7.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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