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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 45: मन्त्री के सात पुत्रों का वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.45.16 
स्रवता रुधिरेणाथ स्रवन्त्यो दर्शिता: पथि।
विविधैश्च स्वनैर्लङ्का ननाद विकृतं तदा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में रक्त की नदियाँ बहती हुई दिखाई दे रही थीं और राक्षसों के नाना प्रकार के शब्दों से लंकापुरी उस समय विकृत स्वर में चीखती हुई प्रतीत हो रही थी ॥16॥
 
Rivers of blood were seen flowing on the way and Lankapuri seemed to be screaming in a distorted voice at that time due to the various words of the demons. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)