श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 45: मन्त्री के सात पुत्रों का वध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.45.12 
तलेनाभिहनत् कांश्चित् पादै: कांश्चित् परंतप:।
मुष्टिभिश्चाहनत् कांश्चिन्नखै: कांश्चिद् व्यदारयत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं को सताते हुए उन वीर वानरों ने कितनों को थप्पड़ों से मार डाला, कितनों को पैरों से कुचल डाला, कितनों को घूँसों से मार डाला और कितनों को नखों से टुकड़े-टुकड़े कर डाला॥12॥
 
Those brave monkeys, who were tormenting their enemies, killed some with slaps, crushed some with their feet, killed some with their punches and tore some to pieces with their nails.॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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