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श्लोक 5.45.11  |
स कृत्वा निनदं घोरं त्रासयंस्तां महाचमूम्।
चकार हनुमान् वेगं तेषु रक्ष:सु वीर्यवान्॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| महाबली हनुमान्जी ने बड़े जोर से गर्जना करके राक्षसों की विशाल सेना को भयभीत कर दिया और बड़े बल से उन पर आक्रमण किया॥11॥ |
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| The mighty Hanuman roared loudly, frightening the huge army of demons and attacked them with great force. ॥ 11॥ |
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